स्वतंत्रता दिवस पर केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम कंपनियों को बड़ी राहत देते हुए पेट्रोल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी घटाकर शून्य कर दी है। लेकिन क्या इससे आपकी गाड़ी की टंकी सस्ती भरेगी या सारा मुनाफा केवल तेल रिफाइनरियों की जेब में जाएगा?
आखिर हुआ क्या?
सरकार ने हर 15 दिन में होने वाली समीक्षा के बाद 14 अगस्त की रात विंडफॉल प्रॉफिट टैक्स (SAED) में बड़ा संशोधन किया है। 3.5 रुपये प्रति लीटर लगने वाले पेट्रोल एक्सपोर्ट टैक्स को पूरी तरह खत्म यानी जीरो कर दिया गया है।
इसके साथ ही डीजल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी 25.5 रुपये से घटाकर 24 रुपये प्रति लीटर और जेट फ्यूल (ATF) पर 22 रुपये से घटाकर 19.5 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है। 3 अगस्त को बढ़ाए गए टैक्स के बाद यह कंपनियों के लिए बहुत बड़ी राहत मानी जा रही है।
लेकिन असली असर कहाँ पड़ेगा?
आम आदमी की उम्मीदों पर सीधा पानी फिर गया है। वित्त मंत्रालय के नोटिफिकेशन के मुताबिक, घरेलू बाजार में बिकने वाले पेट्रोल-डीजल पर लगने वाले टैक्स या रिटेल रेट में 1 पैसे की भी कटौती नहीं हुई है।
यह सारा खेल सिर्फ विदेशों में तेल बेचने वाली रिफाइनरियों का है। Reliance और Nayara जैसी निजी रिफाइनरियों का मार्जिन बढ़ जाएगा, लेकिन देश के आम आदमी को पेट्रोल पंप पर वही पुराना रेट देना होगा।
सोशल मीडिया पर लोग क्यों भड़क गए?
ट्विटर (X) पर इस फैसले के आते ही बहस छिड़ गई है।
- पक्ष A (कंपनियों के समर्थक): “मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और युद्ध के बीच घरेलू सप्लाई सामान्य बनाए रखने के लिए यह कदम जरूरी था। कंपनियों को नुकसान से बचाना जरूरी है।”
- पक्ष B (आम जनता का गुस्सा): “जब कंपनियों का टैक्स घट रहा है तो आम मिडिल क्लास को राहत क्यों नहीं? अंतरराष्ट्रीय बाजार का फायदा सिर्फ रिफाइनरियों को ही क्यों मिले?”
1. विंडफाल टैक्स (Windfall Tax) क्या होता है और सरकार इसे क्यों लगाती है?
विंडफाल टैक्स एक ऐसा विशेष टैक्स है जो सरकार उन कंपनियों पर लगाती है जिन्हें किसी वैश्विक परिस्थिति या अचानक आए बाजार बदलाव की वजह से “अप्रत्याशित लाभ” (Unearned Extra Profits) होता है।
- शुरुआत कब हुई: भारत सरकार ने पहली बार जुलाई 2022 में रिफाइनिंग कंपनियों पर यह टैक्स लगाया था।
- लगाने का मकसद: जब रूस-यूक्रेन या मिडिल ईस्ट तनाव की वजह से ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल के दाम चढ़ते हैं, तो भारतीय रिफाइनरियां घरेलू बाजार में सप्लाई देने के बजाय विदेशों में तेल निर्यात करके भारी मुनाफा कमाने लगती हैं। देश के भीतर पेट्रोल-डीजल की किल्लत न हो, इसीलिए सरकार एक्सपोर्ट पर भारी टैक्स लगाकर इसे नियंत्रित करती है।
2. देश की बड़ी कंपनियों पर इस फैसले का क्या असर होगा?
टैक्स शून्य होने और कटौती मिलने से देश की प्रमुख तेल कंपनियों के ऑपरेटिंग मार्जिन और एक्सपोर्ट प्रॉफिट में बड़ा सुधार होगा:
- निजी रिफाइनरीज (Reliance Industries & Nayara Energy): इन कंपनियों को सबसे ज्यादा फायदा मिलेगा क्योंकि इनका बड़ा बिजनेस मॉडल रिफाइंड फ्यूल को यूरोपीय और एशियाई बाजारों में निर्यात करने पर आधारित है।
- सरकारी तेल कंपनियां (IOCL, BPCL, HPCL): हालांकि ये कंपनियां मुख्य रूप से घरेलू बाजार की पूर्ति करती हैं, लेकिन एक्सपोर्ट पर टैक्स का बोझ घटने से इनकी ओवरऑल बैलेंस शीट मजबूत होगी।
3. क्या आने वाले दिनों में भारत में पेट्रोल-डीजल सस्ता हो सकता है?
घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें (Retail Prices) दो मुख्य चीजों पर निर्भर करती हैं:
घरेलू एक्साइज ड्यूटी और VAT: जब तक केंद्र सरकार सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी या राज्य सरकारें VAT में कटौती नहीं करतीं, तब तक आम जनता के लिए पेट्रोल पंपों पर कीमतें कम होना मुश्किल है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Brent Crude) की कीमत: अगर क्रूड ऑयल $70-75 प्रति बैरल के आसपास बना रहता है, तो तेल कंपनियों के पास मार्जिन बचेगा।
