बाजार खुलते ही देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी LIC OFS के शेयर 8.5% तक धड़ाम हो गए, जिससे पोर्टफोलियो में लाल निशान देखकर आम निवेशकों की नींद उड़ गई।
लेकिन घबराने से पहले गणित समझिए—सरकार ने कुल 6.5% हिस्सेदारी बेचने के लिए ₹382 का फ्लोर प्राइस तय किया है और रिटेल वालों को स्पेशल ₹10 का डिस्काउंट भी दिया जा रहा है।
आखिर हुआ क्या?
दीपांम (DIPAM) सचिव अरुणिश चावला ने बताया कि LIC OFS के पहले ही दिन संस्थागत निवेशकों (Institutional Investors) ने 3.32 गुना ज्यादा बोलियां लगा दीं।
इसी वजह से सरकार ने पूरा 4% का ‘ग्रीन शू ऑप्शन’ (Green Shoe Option) इस्तेमाल करने का फैसला किया, जिससे अब सरकार 82.22 करोड़ शेयर बेचकर करीब ₹31,000 करोड़ जुटाएगी।
लेकिन असली असर कहाँ पड़ेगा?
आम रिटेल निवेशक सोच रहे हैं कि LIC OFS क्या कंपनी का बिजनेस खराब हो गया है? बिल्कुल नहीं, यह सिर्फ सप्लाई और डिस्काउंट का गेम है।
बाजार में LIC OFS एक साथ भारी मात्रा में शेयर आने से कीमत फ्लोर प्राइस ₹382 के करीब आ गई है।
मिडिल क्लास की जेब पर इसका सीधा असर यह है कि जो लोग 2022 के IPO में ₹902-949 देकर पछता रहे थे, उन्हें अब ₹372 (कट-ऑफ पर ₹10 डिस्काउंट के बाद) में एंट्री का नया मौका मिल रहा है।
साथ ही, SEBI के नियम के मुताबिक सरकार को मई 2027 तक अपनी हिस्सेदारी घटाकर 90% करनी थी, जिसे वे समय से पहले पूरा कर रहे हैं।
सोशल मीडिया पर लोग क्यों भड़क गए?
सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म X और इंस्टाग्राम पर इस फैसले को लेकर निवेशकों के दो धड़े बन गए हैं।
Side A (गुस्साए निवेशक): “सरकार जब भी PSU का LIC OFS लाती है, रिटेल इन्वेस्टर्स का बजट बिगाड़ देती है! LIC का चार्ट फिर रेड ज़ोन में चला गया।”
Side B (स्मार्ट बायर्स): “यह कोई घाटे की कंपनी नहीं है। FY26 में कंपनी का नेट प्रॉफिट 19.3% बढ़कर ₹57,419 करोड़ रहा है। डिस्काउंट पर शेयर उठाने का इससे बेहतर सिस्टम नहीं मिलेगा।”
