भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) आपकी जेब में रखे banknote ₹10 और ₹20 के नोटों का चेहरा बदलने की तैयारी में है। जल्द ही बाजार में बेहद मजबूत और टिकाऊ ‘पॉलीमर’ यानी प्लास्टिक के नोटों का ट्रायल शुरू होने जा रहा है।
आखिर हुआ क्या?
RBI की नोट छापने वाली कंपनी BRBNMPL ने भारतीय banknote को अपग्रेड करने के लिए एक वैश्विक टेंडर (EOI) जारी किया है। इसके तहत देश में ही पॉलीमर सबस्ट्रेट (विशेष प्लास्टिक शीट) बनाने वाली फैक्टरी लगाने के लिए विदेशी कंपनियों से तकनीक मांगी गई है।
पहले फेज में ₹10 और ₹20 के छोटे नोटों का पायलट प्रोजेक्ट शुरू होगा। अगर यह ट्रायल सफल रहा, तो साल 2027 से बड़े पैमाने पर ये नए नोट पूरे देश में जारी कर दिए जाएंगे।
लेकिन असली असर कहाँ पड़ेगा?
आम भारतीय के लिए सबसे बड़ी राहत यह होगी कि अब पानी में भीगने, पसीने या जेब में मुड़ने से नोट फटने की टेंशन खत्म हो जाएगी। पॉलीमर banknote कागजी नोटों के मुकाबले 3 से 4 गुना ज्यादा चलते हैं, पानी और मिट्टी प्रूफ होते हैं और इन्हें नकली बनाना लगभग नामुमकिन होता है।
काम की बात: आपके पास रखे पुराने कागजी नोट बिल्कुल बंद नहीं होंगे। नए प्लास्टिक और पुराने कागजी नोट बाजार में एक साथ (Co-exist) चलते रहेंगे।
सोशल मीडिया पर लोग क्यों भड़क गए?
जैसे ही RBI के टेंडर की खबर आई, यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने X (ट्विटर) पर सरकार को घेर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि विदेशी कंपनियों से शीट मंगाना देश की करेंसी का निजीकरण (Privatisation) करने जैसा है।
इसके बाद सोशल मीडिया पर जंग छिड़ गई। विपक्ष के समर्थक इसे ‘banknote की आउटसोर्सिंग’ बता रहे हैं, जबकि सरकार समर्थकों का कहना है कि जब यूपीए सरकार थी, तब भी भारत नोट छापने का कागज विदेशों से ही आयात करता था। मोदी सरकार आने के बाद ही मैसूर में देश का अपना बैंक नोट पेपर मिल शुरू हुआ।
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RBI जल्द ही ₹10 और ₹20 के पॉलीमर (प्लास्टिक) banknote का पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने जा रहा है। जानिए इस नए बदलाव का आम जनता की जेब पर क्या असर होगा और क्यों छिड़ा है इस पर सियासी बवाल।
