भारतीय रेलवे ने आज इतिहास रच दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा के जींद से देश की पहली Hydrogen Train India को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह ट्रेन सिर्फ एक नई टेक्नोलॉजी नहीं है, बल्कि आने वाले समय में आपके सफर के खर्च और प्रदूषण दोनों को आधा करने का सबसे बड़ा गेमचेंजर फॉर्मूला है।
आखिर हुआ क्या?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा के जींद-सोनीपत रूट (89 किमी) पर देश की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन का उद्घाटन किया। 10 कोच वाली यह ट्रेन पूरी तरह ‘Made in India’ है, Hydrogen Train India जिसमें 1,200 kW का हाइड्रोजन फ्यूल सेल सिस्टम लगा है। यह ट्रेन हवा से ऑक्सीजन और अपने सिलेंडरों से हाइड्रोजन लेकर खुद बिजली बनाएगी और बिना किसी धुएं के 75 किमी/घंटा की रफ्तार से दौड़ेगी। इससे सिर्फ पानी की भाप (Water Vapour) और गर्मी बाहर निकलेगी।
लेकिन असली असर कहाँ पड़ेगा?
क्या आप जानते हैं कि भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है? लाल सागर और हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जारी युद्ध जैसी स्थितियों के कारण जब भी डीजल महंगा होता है, सीधा असर आपकी जेब और महंगाई पर पड़ता है। इस हाइड्रोजन तकनीक के आने से रेलवे की डीजल पर निर्भरता खत्म होगी। सफर सस्ता होगा, ट्रेनें बिना शोर के चलेंगी और आपके बच्चों को प्रदूषण मुक्त हवा मिलेगी।
शॉकिंग फैक्ट: हाइड्रोजन में डीजल के मुकाबले तीन गुना ज्यादा एनर्जी (120 MJ/kg) होती है। यानी कम ईंधन में ज्यादा लंबी दूरी और जीरो प्रदूषण!
सोशल मीडिया पर लोग क्यों भड़क गए?
इस ऐतिहासिक शुरुआत के साथ ही डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर बहस छिड़ गई है।
- पक्ष A (प्रशंसक): लोग इसे “नया भारत” और “आत्मनिर्भरता” का प्रतीक बता रहे हैं। उनका कहना है कि जर्मनी और चीन के बाद भारत का इस लीग में शामिल होना गर्व की बात है।
- पक्ष B (आलोचक): दूसरी तरफ, कुछ सोशल मीडिया यूजर्स का कहना है कि सिर्फ 89 किमी के रूट पर ट्रायल करने से क्या होगा? जब तक यह पूरे देश में नहीं फैलती और इसका किराया आम आदमी के बजट में नहीं आता, तब तक इसे गेमचेंजर कहना जल्दबाजी होगी।
