शेयर बाजार में निवेश करने वालों के लिए एक बेहद डराने वाली खबर सामने आई है। इस तगड़े एक्शन से न सिर्फ दलाल स्ट्रीट सहम गई है, बल्कि देश के करोड़ों पॉलिसीधारकों की धड़कनें भी बढ़ गई हैं।
आखिर हुआ क्या?
मार्केट रेगुलेटर SEBI ने एक अंतरिम आदेश जारी करके Rajesh Exports और उसके प्रमोटर-चेयरमैन राजेश मेहता पर शेयर बाजार में ट्रेडिंग करने से पूरी तरह बैन लगा दिया है। आरोप इतना संगीन है कि सुनकर होश उड़ जाएंगे। रेगुलेटर के मुताबिक, कंपनी ने वित्त वर्ष 2021 से 2025 के बीच अपने रेवेन्यू में ₹15.15 लाख करोड़ की भारी हेरफेर दिखाई है। यह रकम इतनी बड़ी है कि कई छोटे देशों की कुल जीडीपी से भी ज्यादा है। SEBI का कहना है कि कंपनी ने अपनी स्विस सब्सिडियरी ‘वैलकैम्बी’ (Valcambi SA) के नाम पर फर्जी टर्नओवर दिखाया, जो असलियत में कहीं था ही नहीं।
रिटेंशन पल्स: जहां स्विस ऑडिटर्स के मुताबिक वैलकैम्बी का असली रेवेन्यू सिर्फ ₹543 करोड़ था, वहीं राजेश एक्सपोर्ट्स ने अपनी किताबों में इसे ₹2.81 लाख करोड़ का भारी-भरकम बिजनेस दिखा दिया! यानी सीधे-सीधे 99% का विजुअल झोल।
लेकिन असली असर कहाँ पड़ेगा?
इस पूरी कहानी में सबसे बड़ा ट्विस्ट ये है कि इसमें आपका और हमारा पैसा भी दांव पर लगा है। सरकारी बीमा कंपनी LIC की राजेश एक्सपोर्ट्स में 10.8% की हिस्सेदारी है। LIC का यह पैसा देश के आम मिडिल क्लास परिवारों की खून-पसीने की कमाई और पॉलिसी के प्रीमियम से आता है। SEBI के शुरुआती अनुमान के मुताबिक, इस गड़बड़ी की वजह से निवेशकों के ₹12,726 करोड़ स्वाहा हो चुके हैं। खबर बाहर आते ही कंपनी के शेयरों में 5% का लोअर सर्किट लग गया और यह टूटकर ₹103 के पास पहुंच गया। इसके अलावा, केनरा बैंक का भी कंपनी पर ₹509 करोड़ का कर्ज फंसा हुआ है।
सोशल मीडिया पर लोग क्यों भड़क गए?
इस खुलासे के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) और इंस्टाग्राम पर एक डिजिटल सुनामी आ गई है। विपक्ष के नेता जयराम रमेश ने सीधे सरकार को घेरते हुए सवाल उठाया है कि क्या LIC ने किसी “रूलिंग इकोसिस्टम” के दबाव में आकर इस डूबती कंपनी में इतना बड़ा इन्वेस्टमेंट किया था? सोशल मीडिया पर जनता दो गुटों में बंट गई है।
पक्ष A का कहना है कि यह सीधे तौर पर कॉर्पोरेट गवर्नेंस का मर्डर है और इसमें ऑडिटर्स की भी मिलीभगत है।
पक्ष B का मानना है कि जब तक फाइनल रिपोर्ट नहीं आती, तब तक कंपनी को पूरी तरह दोषी नहीं मानना चाहिए।
अगले 24 घंटे क्यों महत्वपूर्ण हैं?
कंपनी ने अपने बचाव में बयान जारी कर कहा है कि यह सिर्फ एक “कम्युनिकेशन गैप” और कंफ्यूजन है, उनका रेवेन्यू बिल्कुल सही है। लेकिन असली परीक्षा अगले 24 घंटों में होगी। SEBI ने कंपनी को 30 दिनों के भीतर सारे पक्के दस्तावेज जमा करने का अल्टीमेटम दिया है और एक नए फॉरेंसिक ऑडिटर की नियुक्ति के आदेश दे दिए हैं। कल सुबह जब दोबारा मार्केट खुलेगा, तो LIC के शेयर और केनरा बैंक के स्टॉक पर इसका सीधा असर देखने को मिल सकता है।
Micro-FAQ Section
Q1. क्या राजेश एक्सपोर्ट्स में लगा LIC का पैसा पूरी तरह डूब जाएगा?
Ans: पूरी तरह नहीं, लेकिन कंपनी के शेयर 3 साल में 80% से ज्यादा टूट चुके हैं। अगर SEBI की जांच में यह धोखाधड़ी सच साबित होती है, तो LIC को भारी नुकसान (Wealth Erosion) उठाना पड़ेगा, जिसका सीधा असर उसकी वैल्यूएशन पर दिखेगा।
Q2. आम रिटेल निवेशकों को अब इस शेयर में क्या करना चाहिए?
Ans: SEBI के बैन के बाद स्टॉक में लोअर सर्किट लग रहे हैं और लिक्विडिटी खत्म हो चुकी है। मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ऐसे गंभीर फ्रॉड के आरोपों के बीच नए निवेशकों को इस शेयर से कोसों दूर रहना चाहिए।
Q3. SEBI की इस जांच की शुरुआत किस वजह से हुई थी?
Ans: मार्च 2024 में एक शेयरहोल्डर ने शिकायत की थी कि कंपनी के बही-खातों में करोड़ों रुपये का ‘ट्रेड रिसीवेबल्स’ (बकाया पैसा) 2 साल से ज्यादा समय से बिना किसी वजह के अटका हुआ है, जिसने इस पूरे घोटाले की पोल खोल दी।
यदि आपके पास भी LIC की कोई पॉलिसी है या आपने शेयर बाजार में सीधे निवेश किया है, तो क्या आपको लगता है कि सरकारी संस्थाओं को जनता के पैसे ऐसे रिस्की स्टॉक्स में लगाने चाहिए? कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरूर दें और इस जरूरी अपडेट को अपने दोस्तों के साथ शेयर करें।
