Ghengha Rog Ka Ayurvedic ilaj: घेंघा रोग (Goiter) एक ऐसी समस्या है जिसमें गले के सामने थायरॉयड ग्रंथि का आकार बढ़ जाता है, जिससे गले में सूजन या उभार दिखाई देता है। यह समस्या आमतौर पर शरीर में आयोडीन की कमी, हार्मोन के असंतुलन या अन्य कारणों से होती है। आयुर्वेद में इसे “गलगंड” कहा जाता है और इसका मुख्य कारण कफ और वात दोष का असंतुलन माना जाता है। इस लेख में हम घेंघा के आयुर्वेदिक उपचार, उपयोगी जड़ी-बूटियों, खाने-पीने की आदतों और जीवनशैली से जुड़े सुझावों के बारे में सरल भाषा में जानकारी देंगे।
घेंघा के लक्षण और कारण
- लक्षण: गर्दन में गांठ या सूजन आना, खाना निगलने में दिक्कत होना, सांस लेने में परेशानी होना, आवाज भारी हो जाना।
- कारण: शरीर में आयोडीन की कमी, थायरॉयड हार्मोन का असंतुलन, परिवार से मिलने वाली बीमारी, शरीर में वात और कफ का बढ़ जाना।
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आयुर्वेद के नजरिए से
आयुर्वेद के अनुसार, घेंघा रोग मुख्य रूप से कफ और वात दोष के असंतुलन के कारण होता है। थायरॉइड ग्रंथि में गंदगी (विषाक्त पदार्थ) जमा हो जाने और रक्त के ठीक से न बहने को इसका मुख्य कारण माना जाता है। आयुर्वेदिक इलाज का मकसद दोषों को संतुलित करना, गंदगी को दूर करना और ग्रंथि के काम को फिर से ठीक करना होता है।
घेंघा रोग का आयुर्वेदिक इलाज
आयुर्वेद में घेंघा का इलाज करने के लिए जड़ी-बूटियों का उपयोग, खाने-पीने में बदलाव, पंचकर्म और योग शामिल होते हैं। नीचे दी गई तालिका और विधियाँ विस्तार से बताई गई हैं।
Ghengha Rog Ka Ayurvedic ilaj के उपचार की तालिका
जड़ी-बूटी/उपाय | गुण/प्रभाव | लाभ | उपयोग विधि |
कंचनार गुग्गुलु | कफ-वात शामक, डिटॉक्स | थायरॉयड ग्रंथि को संकुचित करता है | दिन में दो बार 1-2 गोली गुनगुने पानी के साथ लें |
अश्वगंधा | रसायन, हार्मोन संतुलन | प्रतिरक्षा बढ़ाता है | 1 चम्मच दूध पाउडर के साथ रात को |
शिलाजीत | पुनर्जीवक, ऊर्जा वर्धक | चयापचय को बेहतर बनाता है | 250 मिलीग्राम सुबह और शाम शहद के साथ लें |
त्रिफला चूर्ण | आम नाशक, पाचक | विषाक्त पदार्थों को हटाता है | 1 चम्मच रात में गर्म पानी के साथ |
ब्राह्मी | मेद्या, शांतिकारक | तनाव घटाता है | पत्तों का रस 5 मिलीलीटर सुबह और शाम पिएं |
गुग्गुलु | एंटी-इंफ्लेमेटरी | सूजन को कम करता है | चूर्ण 500 मिलीग्राम दिन में दो बार |
आहार और जीवनशैली
1. आहार
- शामिल करें: समुद्री नमक, हरी पत्तेदार सब्जियाँ, अखरोट, अदरक, हल्दी।
- परहेज करें: पैकेट वाला खाना, गेंठ वाली सब्जियाँ (जैसे पालक, बंदगोभी), ज्यादा मसाले।
2. जीवनशैली
- सांस की कसरत (उज्जायी, कपालभाति)।
- योग मुद्राएँ: पूरे शरीर का आसन (सर्वांगासन), मछली का आसन (मत्स्यासन)।
- तनाव से निपटने के तरीके: ध्यान और पूरी नींद।
शरीर को शुद्ध करने की प्रक्रिया
- नस्य: दवाई वाले तेल को नाक में डालकर कफ दोष को शांत करना।
- विरेचन: पित्त दोष को साफ करने के लिए दवाई का सेवन।
- अभ्यंग: गले के पास थायरॉयड क्षेत्र पर तिल के तेल से मालिश करना।
घरेलू उपाय
- धनिया पानी: धनिया के बीजों को पानी में उबालकर पीने से फायदा होता है।
- नारियल तेल: गले पर नारियल तेल से हल्की मालिश करने से सूजन कम होती है।
- अदरक का सेवन: अदरक में सूजन को कम करने वाले गुण होते हैं, जो गले की सूजन को कम करते हैं।
योग और प्राणायाम
- सर्वांगासन: यह आसन थायरॉयड ग्रंथि को सक्रिय करता है।
- मत्स्यासन: यह आसन गर्दन और गले में रक्त प्रवाह बढ़ाता है।
- उज्जायी प्राणायाम: यह प्राणायाम गले के रोगों को ठीक करने में मदद करता है।

FAQ: घेंघा रोग के आयुर्वेदिक इलाज से जुड़े सवाल-जवाब
1. क्या आयुर्वेद से घेंघा पूरी तरह ठीक हो सकता है?
- हाँ, अगर शुरुआत में इलाज किया जाए तो आयुर्वेदिक उपचार असरदार हो सकता है, लेकिन गंभीर मामलों में ठीक होने में समय लग सकता है।
2. कंचनार गुग्गुलु कितने दिन तक लेना चाहिए?
- व्यक्ति की सेहत के अनुसार 3 से 6 महीने तक लेना चाहिए, लेकिन इसे आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह से ही लें।
3. क्या सिर्फ आहार से घेंघा ठीक हो सकता है?
- नहीं, आहार के साथ जड़ी-बूटियों और जीवनशैली में बदलाव की भी जरूरत होती है।
4. सर्जरी के बाद आयुर्वेदिक इलाज फायदेमंद है क्या?
- हाँ, सर्जरी के बाद दोबारा समस्या न हो और शरीर को ताकत मिले, इसके लिए आयुर्वेदिक उपचार फायदेमंद होता है।
5. क्या हाइपरथायरॉइडिज्म में अश्वगंधा लेना सुरक्षित है?
- नहीं, अश्वगंधा हाइपोथायरॉइडिज्म में फायदेमंद होती है। हाइपरथायरॉइडिज्म में इसे लेने से पहले डॉक्टर से सलाह लें।
निष्कर्ष
घेंघा रोग का आयुर्वेदिक इलाज प्राकृतिक जड़ी-बूटियों, संतुलित आहार और नियमित योग पर आधारित होता है। इलाज शुरू करने से पहले किसी योग्य आयुर्वेदिक डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। यह उपचार शरीर को मजबूत बनाता है और रोग से लड़ने में मदद करता है। प्राकृतिक उपायों से स्वास्थ्य में सुधार हो सकता है।